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Wednesday, May 30, 2007

ना खुदाने सताया...

ना खुदा ने सताया
ना मौतने रुलाया
रुलाया तो ज़िन्दगीने
माराभी उसीने
ना शिकवा खुदासे
ना गिला मौतसे
थोडासा रेहेम माँगा
तो वो जिन्दगीसे
वही ज़िद करती है
जीनेपे अमादाभी
वही करती है
मौत तो राहत है
वो चूमके पलकें,
गहरी नींद सुलाती है!
ये तो जिन्दगी है
जो नींदे चुराती है!
पर शिकायत से भी,
डरती हूँ उसकी,
ग़र कहीँ सुनले,
ना जीनेके क़ाबिल रखे,
ना मरनेकी इजाज़त दे,
एक ऐसा ,पलट के,
तमाचा जड़ दे...!