Friday, June 1, 2007

तूफान...

कुछ अरसा हुआ
एक तूफान मिला
ज़िंदगी के सब निशाँ
पूरी तरह मिटा गया
फिर वो थम भी गया
पर जीवन के कयी
भेद खोल गया!
आनेवाले कल के बारेमे
चुपके से आगाह कर गया !
हर तूफान से हर बार
मुझे खुद ही निपटना होगा
वो तूफान मुझे समझा गया!
फिर तो कयी तूफान
ज़िन्दगीमे आये गए,
बरबादीके सैंकड़ों निशाँ
कयी बार छोड़ गए
बार बार मुझे भी,
चूर,चूर कर गए,
पर हर बार फिर से
वही बात दोहरा गए,
अकेलेही चलना है तुम्हें
तूफान कान मे कह गए...

लेखिका:बिना इजाज़त लेखन का इस्तेमाल ना करें।

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